स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र:माता-पिता और गुरु देवतुल्य हैं, इसलिए पूजा-पाठ के साथ ही इनका सम्मान भी जरूर करें

स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र:माता-पिता और गुरु देवतुल्य हैं, इसलिए पूजा-पाठ के साथ ही इनका सम्मान भी जरूर करें

Published at : 2026-02-18 23:00:00
भारतीय संस्कृति में माता-पिता, गुरु, घर-परिवार के बड़े लोग और चरित्रवान व्यक्तियों को विशेष सम्मान दिया जाता है। माना जाता है कि इनमें देवता वास करते हैं। इसलिए माता-पिता और पूर्वजों को देवतुल्य कहा गया है। ये साकार देव प्रतिमाएं हैं, क्योंकि इनके भीतर परमात्मा के संस्कार और अंश विद्यमान रहते हैं। अगर हम केवल मंदिरों में मूर्तियों की पूजा करें, लेकिन अपने माता-पिता का अनादर करें, तो यह पूजा अधूरी ही मानी जाती है। देवी-देवताओं की करने पूजा के साथ ही माता-पिता, गुरु और अन्य लोगों का भी सम्मान जरूर करें। आज जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र में जानिए देवता हमारे किस काम से प्रसन्न होते हैं? आज का जीवन सूत्र जानने के लिए ऊपर फोटो पर क्लिक करें।