10 अक्टूबर को पितृ पक्ष का अंतिम दिन:30 साल पर सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या पर शनि का योग, जानिए इस दिन कौन-कौन से शुभ काम करें
Published at : 2026-10-08 23:30:00
कल (शनिवार, 10 अक्टूबर) को सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या है। यह पितृ पक्ष की अंतिम तिथि है, इस दिन घर-परिवार के जाने-अनजाने सभी पितरों के लिए श्राद्ध कर्म करने की परंपरा है। जब शनिवार को अमावस्या होती है, तो उसे शनिश्चरी अमावस्या कहा जाता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, इस साल आश्विन मास की अमावस्या पर सूर्य-चंद्र कन्या राशि में गोचर करेंगे और उन पर शनि की दृष्टि रहेगी। शनि वर्तमान में वक्री है और उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में गोचर हो रहा है। उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी शनि ही है। 2026 से 30 साल पहल 12 अक्टूबर 1996 को ऐसा ही योग बना था। इस बार शनिवार को पितृ मोक्ष अमावस्या, शनि की सूर्य-चंद्र पर दृष्टि और शनि का अपने स्वामित्व के नक्षत्र में ही गोचर होना अद्भुत योग बना रहा है। इसकी वजह से अमावस्या का महत्व और अधिक बढ़ गया है। इन शुभ योगों में पितरों की तृप्ति के साथ ही शनि ग्रह की अनुकूलता के लिए पितरों से आर्शीवाद प्राप्त किया जा सकता है। इस तिथि पर कौन-कौन से शुभ काम कर सकते हैं पितरों के लिए धूप-ध्यान करने के साथ ही इस तिथि पर छोटे बच्चों को खाना दें, दान दें, गाय-कुत्ते और कौए को भी खाना दें, धन देकर निर्धन की मदद करें, रोगी को दवाइयां और फल दें, किसी पवित्र नदी में स्नान करें। मान्यता है कि इन शुभ कामों की वजह से पितरों को तृप्ति मिलती है। इस दिन सुबह स्नान के बाद एक कलश में काले तिल, जौं, कच्चा दूध और जल भरें। इस कलश के सामने शनि मंत्र ऊँ शं शनैश्चराय नम: का जप करें। मंत्र जप कम से कम 108 बार करें। जप के बाद यह कलश किसी पीपल की जड़ में खाली कर दें। पीपल के पास दीपक जलाएं। दोपहर में करीब 12 बजे पितरों के निमित्त धूप-ध्यान करें। मान्यता है कि सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या पर साक्षात महालक्ष्मी और विष्णु जी पीपल में वास करते हैं। पीपल को जल-दूध चढ़ाने और दीपक जलाने से भगवान विष्णु की कृपा से हमारे पितर देवता तृप्त होते हैं। अब जानिए श्राद्ध करने के लिए जरूरी चीजें और श्राद्ध करने की विधि… जरूरी चीजें- गाय के गोबर से बने कंडे, धूप देने के लिए हवन कुंड या अन्य कोई बर्तन, घी, काले तिल, चावल, गुड़, कर्पूर, जल से भरा तांबे का लोटा, फूल, बैठने के लिए आसन। अगर ये सभी चीजें उपलब्ध न हो, तो जल, तिल, कंडे के अंगारे और गुड़-घी से भी श्रद्धापूर्वक पितरों का स्मरण करके धूप-ध्यान किया जा सकता है। आप चाहें तो खीर-पुड़ी भी बना सकते हैं। खीर-पुड़ी से भी धूप दिया जाता है। 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि शुरू सर्वपितृ अमावस्या के साथ पितृ पक्ष खत्म हो जाएगा। इसके बाद 11 तारीख से देवी दुर्गा की पूजा का महाउत्सव शारदीय नवरात्रि शुरू होगा। नवरात्रि में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करने की परंपरा है।