स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र:स्वार्थ हमें अपने ही लाभ तक सीमित कर देता है, जिससे व्यक्ति परिवार से दूर हो जाता है

स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र:स्वार्थ हमें अपने ही लाभ तक सीमित कर देता है, जिससे व्यक्ति परिवार से दूर हो जाता है

Published at : 2026-03-22 23:00:00
परिवार में सदस्यों के बीच स्वार्थ नहीं होना चाहिए, क्योंकि स्वार्थी व्यक्ति केवल अपने हित, अपनी पसंद और अपने आसपास तक सीमित हो जाता है, इस बुराई की वजह से वह परिवार के प्रेम और विश्वास से दूर होने लगता है। परिवार में त्याग, समर्पण, नि:स्वार्थ और आपसी सहयोग की भावना होनी चाहिए। हर सदस्य से अपेक्षा की जाती है कि वह अपनी शक्ति, समय, धन और भावनाएं परिवार के लिए समर्पित करे। जब हम निस्वार्थ भाव से परिवार के लिए काम करते हैं, तब परिवार भी हमें वही प्रेम, सम्मान और सहयोग लौटाता है। आज जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र में जानिए परिवार में सुख बनाए रखने के लिए किन बातों का ध्यान रखें? आज का जीवन सूत्र जानने के लिए ऊपर फोटो पर क्लिक करें।