युद्धविराम के बीच लेबनान में ताबड़तोड़ हमले कर रहा इजरायल, 24 घंटों में 51 लोगों की मौत

युद्धविराम के बीच लेबनान में ताबड़तोड़ हमले कर रहा इजरायल, 24 घंटों में 51 लोगों की मौत

Published at : 2026-05-11 02:49:15
Israel Attacks Lebanon: मध्य पूर्व में के हालात पूरी तरह से ठीक नहीं है. अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर लागू है. जिसके चलते इरान और उसके आसपास के इलाकों में हमले रुके हुए हैं. उधर इजरायल और लेबनान के बीच भी युद्धविराम लागू है, बावजूद इसके इजरायल, लेबनान में लगातार ताबड़तोड़ बमबारी कर रहा है. पिछले 24 घंटों में इजरायल की ओर से ईरान पर किए गए हमलों में कम से कम 51 लोगों की मौत की खबर है. मरने वालों में दो चिकित्साकर्मी भी बताए जा रहे हैं. इजरायली हमलों पर क्या बोला लेबनान? लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि पिछले 24 घंटों में हुए इजरायली हमलों में दो चिकित्साकर्मियों सहित 51 लोग मारे गए हैं. मंत्रालय ने कहा, "इजरायली दुश्मन अंतरराष्ट्रीय कानूनों और मानवीय मानदंडों का उल्लंघन करना जारी रखे हुए है और पैरामेडिक्स के खिलाफ अपराध बढ़ा रहा है. उसने कलाविया और तिबनिन, बिन्त जबील जिले में स्वास्थ्य प्राधिकरण के दो केंद्रों को दो हमलों में सीधे निशाना बनाया." सीजफायर के बावजूद लेबनान पर इजरायली हमले जारी बता दें कि इजरायल और लेबनान के बीच फिलहाल सीजफायर जारी है. अमेरिका की मध्यस्थता दोनों देशों के बीच 16 अप्रैल 2026 को सीजफायर हुआ था. 10 दिनों के लिए हुए इस सीजफायर को बाद में तीन सप्ताह के लिए बढ़ा दिया गया. अब ये युद्धविराम तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है. इस युद्धविराम का मकसद हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच जारी जंग को रोकना था. लेकिन कुछ ही दिनों में ये सीजफायर कमजोर हो गया है और इजरायल ने लेबनान में बमबारी करना शुरू कर दी. लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि 2 मार्च को इजरायली सेना द्वारा नए सैन्य अभियान की शुरुआत के बाद से देश भर में 2,846 लोग मारे गए हैं. इजरायली हमलों में अब तक 103 चिकित्सकों की मौत उधर संयुक्त राष्ट्र (UN) का कहना है कि मार्च से लेकर अब तक 130 से अधिक इजरायली हमलों में कम से कम 103 लेबनानी चिकित्साकर्मी मारे गए हैं और 230 घायल हुए हैं. दक्षिणी लेबनान के टायर में लेबनानी नागरिक सुरक्षा के प्रमुख अली सफीउद्दीन ने अल जज़ीरा को बताया, "हम हर पल, हर दिन खतरे में हैं. हम खुद से पूछते हैं कि क्या हम जीवित रहेंगे या मर जाएंगे. हम जानते हैं कि यहां काम करके हम पहले ही अपनी जान गंवा चुके हैं. हमने इतने सारे लोगों को खो दिया है और ऐसा लगता है जैसे हम भी मर चुके हैं." टायर से रिपोर्टिंग कर रही अल जज़ीरा की ओबैदा हिट्टो ने कहा, "अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून स्पष्ट हैं: चिकित्सा कर्मियों और लेबनानी नागरिक सुरक्षा जैसे प्राथमिक प्रतिक्रियाकर्ताओं को सशस्त्र संघर्ष में संरक्षित किया जाना चाहिए, लेकिन इस मोर्चे पर सवाल यह नहीं है कि एक और हमला होगा या नहीं. सवाल यह है कि मदद की गुहार का जवाब देने के लिए कितने लोग बचेंगे." गाजा और लेबनान दोनों में काम कर चुके युद्ध सर्जन और मानवीय कार्यकर्ता डॉ. ताहिर मोहम्मद ने अल जज़ीरा को बताया कि उन्होंने दोनों स्थानों पर इजरायली कार्रवाइयों में समानताएं देखीं. उन्होंने कहा, "हम गाजा में अपने सहयोगियों को अक्सर आते-जाते देखते थे. मेरे कई सहकर्मी, नर्सें, मेडिकल छात्र इजरायली हथियारों से मारे गए हैं, और इसलिए लेबनान में स्वास्थ्यकर्मियों को निशाना बनाने की वही नीति देखना. यह एकरूपता है." 12 लाख से ज्यादा लेबनानी नागरिक विस्थापित उन्होंने आगे कहा, "अगर इज़रायल की चलती तो वो लेबनान के पूरे दक्षिणी क्षेत्र पर कब्ज़ा कर लेता, और वो कल ही ऐसा कर देता. उन्हें जीवन की कोई परवाह नहीं है. मैंने अपनी आंखों से देखा है." बता दें कि 2 मार्च से अब तक इज़रायली हमलों के कारण 12 लाख से ज़्यादा लेबनानी लोग विस्थापित हो चुके हैं. 16 अप्रैल को युद्धविराम लागू होने के बावजूद हमले और भी बढ़ गए हैं.