पीएम मोदी से सवाल पूछने वाली पत्रकार ने ‘वॉकआउट’ दावे पर दिया तंज, बोलीं सिर्फ पानी पीने गई थी

पीएम मोदी से सवाल पूछने वाली पत्रकार ने ‘वॉकआउट’ दावे पर दिया तंज, बोलीं सिर्फ पानी पीने गई थी

Published at : 2026-05-19 13:18:58
नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नॉर्वे यात्रा के दौरान सवाल पूछकर चर्चा में आईं नॉर्वेजियन पत्रकार हेल्ले लिंग ने अब सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे “वॉकआउट” दावों पर प्रतिक्रिया दी है। पत्रकार ने तंज भरे अंदाज में कहा कि वह प्रेस ब्रीफिंग छोड़कर नहीं गई थीं, बल्कि सिर्फ “एक कप पानी लेने” बाहर गई थीं। उनके इस जवाब के बाद सोशल मीडिया पर बहस और तेज हो गई है। हेल्ले लिंग उस समय विवादों में आ गई थीं जब उन्होंने नॉर्वे में प्रधानमंत्री मोदी से प्रेस स्वतंत्रता और मानवाधिकारों को लेकर सवाल पूछने की कोशिश की थी। बाद में विदेश मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग के दौरान भी उन्होंने भारत में कथित मानवाधिकार उल्लंघन और मीडिया की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठाए थे। इस दौरान विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) Sibi George के साथ उनकी तीखी बहस देखने को मिली थी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वायरल हो रहे एक वीडियो में हेल्ले लिंग भारतीय अधिकारियों से लगातार सवाल पूछती नजर आ रही हैं। इसी वीडियो पर एक यूजर ने टिप्पणी करते हुए लिखा कि पत्रकार जवाब सुने बिना वहां से चली गईं और उन्हें भारत के बारे में कुछ नहीं पता। इस पर हेल्ले लिंग ने जवाब दिया, “मुझे सिर्फ एक कप पानी चाहिए था।” उनका यह जवाब तेजी से वायरल हो गया और कई लोगों ने इसे व्यंग्यात्मक प्रतिक्रिया बताया। इसके बाद एक अन्य यूजर ने उन पर तंज कसते हुए कहा कि पानी उन्हें शांत कर सकता है और उनकी तुलना पर्यावरण कार्यकर्ता Greta Thunberg से कर दी। हालांकि पत्रकार ने संयमित अंदाज में जवाब देना जारी रखा और कहा कि वह सिर्फ थोड़ी देर के लिए पानी लेने गई थीं और बाद में वापस आ गई थीं। एक अन्य पोस्ट में दावा किया गया कि नॉर्वे की प्रेस सवाल पूछकर जवाब सुने बिना कैफे या वॉशरूम चली जाती है और यही तथाकथित प्रेस स्वतंत्रता का उदाहरण है। इस पर हेल्ले लिंग ने कहा कि बातचीत काफी देर तक चली थी लेकिन उनके मानवाधिकारों से जुड़े सवालों का सीधा जवाब नहीं दिया गया। उन्होंने लिखा, “मैंने कई बार अधिक स्पष्ट जवाब देने को कहा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।” जब एक यूजर ने लिखा कि विदेश मंत्रालय ने इस बहस में जीत हासिल की और पत्रकारिता के बजाय यह “गुस्से वाली एक्टिविज्म” थी, तब भी हेल्ले लिंग ने शांत स्वर में जवाब दिया। उन्होंने कहा, “मैं सिर्फ पानी लेने गई थी और वापस आ गई थी। आपकी राय के लिए धन्यवाद।” पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ था जब प्रधानमंत्री मोदी और नॉर्वे के प्रधानमंत्री Jonas Gahr Store के संयुक्त प्रेस बयान के बाद हेल्ले लिंग ने सवाल पूछा था, “आप दुनिया की सबसे स्वतंत्र प्रेस के सवालों का जवाब क्यों नहीं लेते?” हालांकि प्रधानमंत्री मोदी ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी। इसके बाद हेल्ले लिंग ने एक्स पर वीडियो साझा करते हुए लिखा था कि उन्हें पहले से उम्मीद नहीं थी कि प्रधानमंत्री मोदी उनका सवाल लेंगे। उन्होंने यह भी कहा था कि नॉर्वे विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में पहले स्थान पर है जबकि भारत 157वें स्थान पर है और पत्रकारों का काम सत्ता से सवाल पूछना होता है। बाद में भारतीय विदेश मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग में हेल्ले लिंग ने भारत में कथित मानवाधिकार उल्लंघन, प्रेस स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि दुनिया भारत पर भरोसा क्यों करे और क्या प्रधानमंत्री मोदी भारतीय प्रेस के कठिन सवालों का सामना करना शुरू करेंगे। इस पर विदेश मंत्रालय के सचिव सिबी जॉर्ज ने भारत का पक्ष रखते हुए लंबा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि भारत पांच हजार वर्ष पुरानी सभ्यता वाला देश है जिसने दुनिया को बहुत कुछ दिया है। उन्होंने भारत की संस्कृति, लोकतांत्रिक व्यवस्था और कोविड महामारी के दौरान दुनिया की मदद का जिक्र करते हुए कहा कि यही भारत पर भरोसे की असली वजह है। जवाब के दौरान सिबी जॉर्ज कुछ नाराज भी नजर आए और उन्होंने बीच में टोकने से मना किया। इस पूरे विवाद पर भारत में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि सवालों से बचना देश की छवि को नुकसान पहुंचाता है। वहीं भाजपा आईटी सेल प्रमुख Amit Malviya ने पत्रकार और कांग्रेस दोनों पर हमला बोलते हुए कहा कि नॉर्वे के प्रधानमंत्री ने भी संयुक्त प्रेस वार्ता में सवाल नहीं लिए थे। हालांकि हेल्ले लिंग ने इस दावे का भी जवाब दिया और कहा कि नॉर्वे के प्रधानमंत्री ने बाद में भारतीय मीडिया से बातचीत की थी। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर प्रेस स्वतंत्रता, राजनीतिक जवाबदेही और सोशल मीडिया ट्रोलिंग को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी है।