
Kharmas 2026: 3 दिन बाद लग जाएंगे खरमास, क्यों है ये महीना अशुभ, जानें क्या करें, क्या नहीं
Published at : 2026-03-12 09:45:35
Kharmas 2026: इस बार खरमास (मलमास) का महीना 15 मार्च से शुरू होगा. जो 13 अप्रैल 2026 को समाप्त होगा. इस दौरान विवाह, सगाई, यज्ञ, गृह प्रवेश आदि शुभ कार्य नहीं होंगे. साथ ही नया घर या वाहन आदि खरीदना भी वर्जित हैं. ऐसा माना जाता है कि इस माह में सूर्य की गति धीमी हो जाती है. जिस कारण कोई भी शुभ काम सफल नहीं होते हैं.शास्त्रों में खरमास का महीना शुभ नहीं माना गया है. इस अवधि में मांगलिक कार्य करना प्रतिबंधित है. साथ ही इस दौरान कोई भी शादी-विवाह आदि मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं.1 माह तक रहता है खरमासखरमास पूरे एक माह तक रहता है.14 मार्च की अर्द्धरात्रि में सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करते ही खरमास शुरू होगा, जो 13 अप्रैल 2026 को मेष संक्रांति के दिन समाप्त हो जाएगा. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य देव के एक राशि से दूसरे राशि में स्थान बदलने की प्रक्रिया को संक्रांति कहते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूरे एक वर्ष में दो बार ऐसा मौका आता है। जब खरमास लगता है. एक खरमास मध्य मार्च से मध्य अप्रैल के बीच और दूसरा खरमास मध्य दिसंबर से मध्य जनवरी तक होता है.15 मार्च से होगा खरमास प्रारंभपंचांग के अनुसार, 14 मार्च की अर्द्धरात्रि में सूर्य देव मीन राशि में प्रवेश करेंगे. इसके साथ ही खरमास की शुरुआत हो जाएगी. सूर्य देव 13 अप्रैल तक मीन राशि में रहेंगे. इस अवधि में खरमास रहेगा. राशि चक्र की अंतिम राशि मीन है और जब सूर्य मीन राशि में प्रवेश करता है तो खरमास माना जाता है.13 अप्रैल को होगा खरमास समापन15 मार्च से प्रारंभ हो रहे खरमास का समापन 13 अप्रैल को होगा. पंचांग के अनुसार, 14 मार्च की अर्द्धरात्रि में सूर्य देव मीन राशि में प्रवेश करेंगे. इसके साथ ही खरमास की शुरुआत हो जाएगी. सूर्य देव 13 अप्रैल तक मीन राशि में रहेंगे। इस अवधि में खरमास रहेगा.मांगलिक कार्य करना वर्जितधार्मिक और ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, खरमास को शुभ नहीं माना जाता है. इसलिए इस माह के दौरान कोई भी शुभ, मांगलिक कार्य करना वर्जित माना जाता है. इस दौरान हिंदू धर्म में बताए गए संस्कार, जैसे मुंडन संस्कार, यज्ञोपवीत, नामकरण, गृह प्रवेश, गृह निर्माण, नए व्यापार का आरंभ, वधू प्रवेश, सगाई, विवाह आदि कोई भी कार्य नहीं किया जाता है.साल में दो बार लगता है खरमासज्योतिष के अनुसार, साल में दो बार खरमास लगता है. जब सूर्य मार्गी होते हुए बारह राशियों में एक राशि से दूसरी राशि में भ्रमण करते हैं तो इस दौरान बृहस्पति के आधिपत्य वाली राशि धनु और मीन में जब सूर्य का प्रवेश होता है तो खरमास लगता है.इस तरह से मार्च माह मंर जब सूर्य मीन में प्रवेश करते हैं तब खरमास लगता है तो वहीं दिसंबर में जब सूर्य धनु में प्रेवश करते हैं तब खरमास लगता है. इस समय सूर्य की उपासना करने का विशेष महत्व माना जाता है। खासतौर पर जिनकी कुंडली में सूर्य कमजोर स्थिति में हो उन्हें खरमास के दौरान सूर्य उपासना अवश्य करनी चाहिए.क्यों बंद होते हैं शुभ कार्यगुरु देव बृहस्पति धनु राशि के स्वामी हैं. बृहस्पति का अपनी ही राशि में प्रवेश इंसान के लिए अच्छा नहीं होता है. ऐसा होने पर लोगों की कुंडली में सूर्य कमजोर पड़ जाता है. इस राशि में सूर्य के कमजोर होने कारण इसे मलमास कहते हैं. ऐसा कहा जाता है कि खरमास में सूर्य का स्वभाव उग्र हो जाता है. सूर्य के कमजोर स्थिति में होने की वजह से इस महीने शुभ कार्यों पर पाबंदी लग जाती है.इन बातों का रखें ध्यानखरमास में शादी-विवाह जैसे मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं. इस समय अगर विवाह किया जाए तो भावनात्मक और शारीरिक सुख दोनों नहीं मिलते हैं.इस समय मकान का निर्माण या संपत्ति की खरीदारी वर्जित होती है. इस दौरान बनाए गए मकान आमतौर पर कमजोर होते हैं और उनसे निवास का सुख नहीं मिल पाता है.खरमास में नया कार्य या व्यापार शुरू न करें. इससे व्यापार में शुभ फलों के प्राप्त होने की संभावना बहुत कम हो जाती है.इस दौरान द्विरागमन, कर्णवेध और मुंडन जैसे कार्य भी वर्जित होते हैं क्योंकि इस अवधि के किए गए कार्यों से रिश्तों के खराब होने की सम्भावना होती है.इस महीने धार्मिक अनुष्ठान न करें। हर रोज किए जाने वाले अनुष्ठान कर सकते हैं.Chaitra Navratri 2026: खरमास में चैत्र नवरात्रि, क्या घर, वाहन खरीदी, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य किए जा सकते हैं ?Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.